लौकही: बिहार के मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड क्षेत्र से सरकारी संपत्तियों और धार्मिक धरोहरों पर अवैध कब्जे का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। नरहिया स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर के समीप अवस्थित एक सरकारी तालाब को भू-माफिया द्वारा जबरन मिट्टी भरकर अस्तित्व मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर कमेटी के सदस्यों में भारी आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया स्थानीय प्रशासन की सुस्ती का फायदा उठाकर इस सार्वजनिक संपत्ति को हड़पना चाहते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नरहिया के वासियों ने मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला? (लौकही नरहिया तालाब अतिक्रमण विवाद)
स्थानीय सूत्रों और लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी के सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार, नरहिया निवासी देव नारायण साह द्वारा इस सरकारी तालाब पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने सीधा आरोप लगाया है कि आरोपी द्वारा दिन-दहाड़े तालाब में ट्रैक्टरों से मिट्टी डलवाकर उसे भरा जा रहा है। तालाब को समतल करने के बाद अब वहाँ पक्की दीवार खींचकर घर निर्माण करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब इस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया हो। इससे पहले भी उक्त आरोपी द्वारा तालाब के एक बड़े हिस्से पर अवैध रूप से दीवार खड़ी करके पक्का मकान बना लिया गया था। उस समय उचित कानूनी कार्रवाई न होने के कारण आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए, जिसके परिणामस्वरूप अब पूरे तालाब को ही समाप्त कर निजी संपत्ति में तब्दील करने की मनमानी की जा रही है।
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा से जुड़ा है मामला
नरहिया वासियों का कहना है कि यह तालाब किसी व्यक्ति विशेष की निजी जमीन नहीं है, बल्कि यह खतियान में दर्ज एक सरकारी एवं सार्वजनिक तालाब है। इस जलाशय का उपयोग स्थानीय आमजन, राहगीर और श्रद्धालु भक्तजन सदियों से करते आ रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार के सबसे बड़े लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा सहित कई अन्य प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसी तालाब के घाटों पर आयोजित होते रहे हैं।
ऐसी स्थिति में तालाब को धीरे-धीरे भरकर समाप्त करना न सिर्फ पर्यावरण और सरकारी नियमों का सरेआम उल्लंघन है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र के हजारों लोगों की धार्मिक और सामाजिक आस्था को भी गहरी ठेस पहुँच रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संकट के इस दौर में जहाँ सरकार जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत नए तालाब खुदवा रही है, वहीं लौकही में बने-बनाए सरकारी तालाब को भू-माफियाओं के हवाले किया जा रहा है।
ग्रामीणों का मुख्य बयान: यह तालाब हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। हम किसी भी कीमत पर अपनी धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ और इस सार्वजनिक तालाब पर भू-माफियाओं का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अंचलाधिकारी (CO) की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में स्थानीय अंचल प्रशासन की भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। नरहिया वासियों ने बताया कि तालाब पर अतिक्रमण की शुरुआत होते ही पूर्व में स्थानीय अंचलाधिकारी (CO), लौकही को लिखित आवेदन देकर इस अवैध निर्माण को तुरंत रुकवाने की गुहार लगाई गई थी। लेकिन शिकायत के हफ़्तों बीत जाने के बाद भी अंचल प्रशासन द्वारा धरातल पर कोई ठोस या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की इसी कथित उदासीनता और शिथिलता के कारण अतिक्रमणकारी के हौसले सातवें आसमान पर हैं और निर्माण कार्य लगातार जारी है।
अंचल स्तर से न्याय न मिलता देख, अंततः लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी और नरहिया ग्रामवासियों ने एकजुट होकर एक विस्तृत शिकायत पत्र तैयार किया। इस आवेदन को मधुबनी जिलाधिकारी (DM) सहित जिले के अन्य संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजकर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और तालाब को पूर्ववत स्थिति में लाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी (Ground Report)
इस मामले को लेकर नरहिया के ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए एक आवश्यक बैठक की और इसके बाद मीडिया से बातचीत की। मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए नरहिया निवासी राजू प्रसाद साह, शंकर कुमार, रामकृष्ण परमहंस, सुधीर कुमार, अंशु कुमार सिंह, रौशन कुमार, रमेश कुमार, शिवम कुमार, पप्पू गुप्ता, ओमकार कुमार, भरत साहू, राधे, मनोज कुमार यादव, मनोज कुमार साह, बैजनाथ प्रसाद साह, चंदन कुमार, बसंत कुमार चोपड़ा सहित छठ पूजा समिति नरहिया के दर्जनों सदस्यों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है।

ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि तालाब को बचाना उनके अस्तित्व को बचाने जैसा है। यदि मधुबनी जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने अविलंब इस अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया और तालाब को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया, तो सभी नरहिया वासी और छठ पूजा समिति के सदस्य सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।










