लौकही (मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड अंतर्गत करियौत गांव से एक बेहद ही हृदयविदारक और दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ मंगलवार को खेत में सिंचाई के लिए बिजली की मोटर लगाने के दौरान एक युवक की करंट की चपेट में आने से असमय मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे करियौत गांव और आसपास के इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है।
मृतक की पहचान करियौत गांव निवासी राम उदगार ठाकुर के 28 वर्षीय पुत्र शिवकुमार ठाकुर के रूप में हुई है। शिवकुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और पूरे परिवार की उम्मीदों का मुख्य सहारा थे। इस हादसे के बाद से मृतक के घर में चीख-पुकार मची हुई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
खेत में सिंचाई के दौरान हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार को शिवकुमार ठाकुर अपने खेत की सिंचाई करने के लिए गए हुए थे। खेत में पानी पटाने के उद्देश्य से वे बिजली की मोटर को सेट कर रहे थे और उसके तारों को जोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली का जोरदार करंट प्रवाहित हो गया और शिवकुमार उसकी चपेट में आ गए।
करंट का झटका इतना जोरदार था कि वे वहीं तड़पने लगे। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों की नजर जैसे ही शिवकुमार पर पड़ी, उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बिजली की मुख्य आपूर्ति (सप्लाई) को बंद करवाया। ग्रामीण और परिजन आनन-फानन में शिवकुमार को उठाकर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), लौकही लेकर भागे। अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों की टीम ने तत्परता से उनकी जांच की, लेकिन दुर्भाग्यवश डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा मौत की पुष्टि होते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
बूढ़े माता-पिता का सहारा छीना, बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
इस असमय और आकस्मिक मौत ने शिवकुमार के परिवार को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है। मृतक शिवकुमार अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनकी तीन बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है या परिवार उन पर निर्भर था। शिवकुमार अपने पीछे अपनी पत्नी और दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं।
वृद्ध माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी टूट गई है, वहीं एक बेबस पत्नी के सिर से उसका जीवनसाथी हमेशा के लिए जुदा हो गया। दो मासूम बच्चों को तो शायद अभी यह भी अहसास नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
शिवकुमार गांव में ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे टीवी, रेडियो, पंखे आदि) की मरम्मत का काम करते थे। वे अपनी इस छोटी सी दुकान से होने वाली कमाई से पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। वहीं उनके वृद्ध पिता राम उदगार ठाकुर मजदूरी करने के साथ-साथ अपने पारंपरिक पेशे के रूप में लोहार का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत मजबूत नहीं थी, और अब घर के मुख्य कमाऊ सदस्य की मौत के बाद इस गरीब परिवार के सामने आजीविका का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लौकही के प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही लौकही थाना पुलिस की एक टीम अस्पताल पहुँची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पंचनामा तैयार किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, मधुबनी भेज दिया गया।
लौकही थाना पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि मामला पूरी तरह से दुर्घटना का प्रतीत होता है, फिर भी पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

गांव में पसरा सन्नाटा, मुआवजे की मांग
इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे करियौत गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के किसी भी घर में मंगलवार को चूल्हा तक नहीं जला। बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शोकाकुल परिवार के घर पहुँच रहे हैं और पीड़ित माता-पिता तथा पत्नी को ढांढस बंधा रहे हैं।
ग्रामीणों ने इस दुख की घड़ी में गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए बिहार सरकार और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिवकुमार ही इस परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, इसलिए सरकार को तुरंत संज्ञान लेते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के तहत उचित मुआवजा राशि प्रदान करनी चाहिए, ताकि बेसहारा हो चुकी पत्नी और दोनों मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।








