आज के इस चकाचौंध और डिजिटल युग में जब कोई युवा डॉक्टर बनता है, तो उसका सबसे पहला सपना होता है दिल्ली, मुंबई, पटना या किसी बड़े महानगर में अपनी प्रैक्टिस शुरू करना। हर कोई चाहता है कि ब्रांडेड लाइफस्टाइल हो, आलीशान गाड़ी हो और जेब में लाखों-करोड़ों की कमाई हो। ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कों और सुविधाओं की कमी को देखकर अक्सर बड़े-बड़े डिग्रीधारी डॉक्टर वहां जाने से कतराते हैं।
लेकिन, इसी दौर में एक ऐसा भी युवा डॉक्टर है जिसने इन तमाम सुख-सुविधाओं और मुंबई जैसे महानगर की आलीशान नौकरी को लात मार दी। हम बात कर रहे हैं डॉ मिथिलेश कुमार यादव की, जिन्होंने महाराष्ट्र से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद बच्चों के इलाज में विशेषज्ञता (DCH in Paediatric) हासिल की। मुंबई में वे एक बेहतरीन पद पर कार्यरत थे और अच्छा-खासा रुपया कमा रहे थे। लेकिन उनकी आत्मा हमेशा अपने गृह क्षेत्र के गरीब और बेबस लोगों के लिए तड़पती थी। आज वे बिहार के मधुबनी जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र खुटौना के 16 आरडी चौक, चतुर्भुज पिपराही में एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल (SD Memorial Children Hospital) चलाकर हजारों बच्चों को नई जिंदगी दे रहे हैं।
जब भूमि न्यूज़ लाइव की टीम पहुंची ग्राउंड जीरो पर: सामने आई डॉक्टरों के मसीहा रूप की सच्चाई
डॉ मिथिलेश कुमार यादव और उनके एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की गूंज जब चारों तरफ फैलने लगी, तो Bhoomi News Live की लाइव टीम जमीनी हकीकत जानने सीधे अस्पताल परिसर में पहुंची। वहां जो नजारा देखने को मिला, वह वाकई भावुक करने वाला था। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों की आंखों में डॉ. मिथिलेश के लिए भगवान जैसा सम्मान था।


टीम ने वहां मौजूद छातापुर के एक निवासी से बात की, जो अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने वहां पहुंचे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम अपने बच्चे को लेकर दरभंगा या पटना जा सकें। वहां के बड़े अस्पतालों का खर्च सुनते ही हमारे पैर कांप जाते थे। लेकिन जब हम यहां एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में डॉ मिथिलेश कुमार यादव के पास आए, तो उन्होंने बहुत ही सस्ते रेट में और बेहद शानदार तरीके से मेरे बच्चे का इलाज किया। हम तो डॉक्टर साहब को दिल से धन्यवाद और आशीर्वाद देते हैं। भगवान उन्हें खूब तरक्की दे।

वहीं, दूसरी तरफ बसनीया बलानपट्टी से आई एक महिला ने रोते-रोते अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया:

मैं दरभंगा के बड़े-बड़े डॉक्टरों के चक्कर काट-काटकर थक चुकी थी। वहां हर बार इतनी महंगी और ढेर सारी दवाइयां लिख दी जाती थीं कि देखते-देखते हमारे डेढ़ लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। फिर किसी ने मुझे डॉ मिथिलेश कुमार यादव के बारे में बताया। आज मैं पिछले एक महीने से यहां इलाज करा रही हूँ। स्वास्थ्य में बहुत ज्यादा सुधार है और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां इलाज में नाममात्र का खर्च आ रहा है।
पिता का सपना और एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की भावुक कहानी
भूमि न्यूज़ लाइव के पत्रकार कार्तिक कुमार और राहुल कुमार प्रियदर्शी ने जब खुद डॉ मिथिलेश कुमार यादव से बात की और उनसे पूछा कि आखिर मुंबई की शानदार जिंदगी छोड़कर इस पिछड़े और सुदूर ग्रामीण इलाके में आने की प्रेरणा कहां से मिली? तो डॉक्टर साहब की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि:
यह अस्पताल सिर्फ एक अस्पताल नहीं है, बल्कि मेरे स्वर्गीय पिता जी का सपना है। मेरे पिताजी का हमेशा से यह अरमान था कि उनका बेटा जब भी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करके आए, तो बड़े शहरों में जाकर पैसे बटोरने के बजाय अपने गांव की गरीब जनता, लाचार मां-बाप और उनके बीमार बच्चों की सेवा करे। आज भले ही मेरे पिताजी हमारे बीच इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मैंने यह पूरा अस्पताल और अपनी जिंदगी उनके इसी सपने को समर्पित कर दी है। इसीलिए मैंने इस अस्पताल का नाम भी अपने पूज्य पिताजी के नाम पर एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल रखा है।

अस्पताल की अनोखी नीतियां: रविवार को मुफ्त OPD और बुजुर्गों का सहारा
डॉ मिथिलेश कुमार यादव ने बातचीत के दौरान कुछ ऐसी घोषणाएं और नियम बताए, जिन्हें सुनकर समाज के हर वर्ग को उन पर गर्व होगा। उन्होंने बताया कि इस ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को हर गरीब तक पहुंचाने के लिए उन्होंने कुछ विशेष कदम उठाए हैं:
- रविवार को पूरी तरह फ्री OPD: रविवार के दिन अस्पताल में आने वाले हर मरीज के लिए ओपीडी सेवा बिल्कुल मुफ्त रहती है। चाहे कोई गरीब हो या अमीर, किसी से भी ओपीडी का कोई चार्ज नहीं लिया जाता।
- 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों का मुफ्त इलाज: समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने नियम बनाया है कि 60 साल से ज्यादा उम्र के जितने भी बुजुर्ग हैं, उनसे इलाज के लिए एक रुपया भी नहीं लिया जाता। उन्हें सिर्फ अपना आधार कार्ड लेकर आना होता है और उनका पूरा इलाज एसडी मेमोरियल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में मुफ्त किया जाता है।

समाज को है ऐसे होनहार और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत
जब इस पूरे इलाके में बाल रोग विशेषज्ञों (चिल्ड्रेन स्पेशलिस्ट) की भारी कमी थी, तब लोगों को एक छोटी सी बीमारी के लिए भी सैकड़ों किलोमीटर दूर दरभंगा या पटना भागना पड़ता था, जिससे कई बार समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे दम तोड़ देते थे। ऐसे दौर में डॉ मिथिलेश कुमार यादव ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में आकर चिकित्सा सेवा का जो दीप जलाया है, वह अद्वितीय है।
भूमि न्यूज़ लाइव की टीम और स्थानीय समाज ऐसे होनहार, संवेदनशील और अपने माता-पिता के संस्कारों को जीने वाले युवा डॉक्टर को सलाम करता है। आज समाज के हर प्रबुद्ध नागरिक को आगे आकर ऐसे डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाना चाहिए, ताकि देश के हर गांव को अपना मिथिलेश मिल सके।







