लौकही (मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिला अंतर्गत लौकही प्रखंड में जन-समस्याओं और मजदूरों के अधिकारों को लेकर सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। बुधवार को बिहार प्रांतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन (बी.प्रा.खे.म.यू.) की अंचल कमिटी, लौकही के बैनर तले अंचल सह प्रखंड कार्यालय परिसर में एक विशाल और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में लौकही प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों की संख्या में किसान, खेत मजदूर, गरीब और संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां थीं और वे स्थानीय अंचल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे।
मांगों की लंबी सूची: मनरेगा से लेकर भ्रष्टाचार मुक्ति तक
प्रदर्शन के दौरान मजदूर नेताओं ने स्थानीय प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों की एक लंबी फेहरिस्त रखी। संगठन के कार्यकर्ताओं का मुख्य रूप से आरोप था कि अंचल कार्यालयों में गरीबों और भूमिहीनों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित मुख्य मांगों को प्रमुखता से उठाया:
- रोजगार और उचित मजदूरी: मनरेगा कानून-2005 को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। हर गरीब परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाए और बढ़ती महंगाई को देखते हुए प्रतिदिन की मजदूरी को बढ़ाकर 700 रुपये किया जाए।
- जमीन का अधिकार: भूदान के तहत मिली जमीनों और सरकारी पर्चाधारियों को उनकी आवंटित जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाया जाए। दबंगों द्वारा छीनी गई जमीनों से गरीबों को मुक्त कराया जाए।
- आवास योजना: क्षेत्र के समस्त भूमिहीन और बेघर परिवारों को पक्का मकान (प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत) उपलब्ध कराया जाए।
- कार्यालय में सुधार: दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और परिमार्जन के कार्यों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितताओं और धांधली पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, अंचल कार्यालय को बिचौलियों और दलालों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराया जाए ताकि आम जनता को बिना किसी रिश्वत के न्याय मिल सके।
सीओ की अनुपस्थिति से थमी वार्ता, बढ़ा आक्रोश
इस विशाल प्रदर्शन के बीच अंचल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच उस समय गतिरोध पैदा हो गया, जब यह पता चला कि अंचलाधिकारी (सीओ) किसी अति आवश्यक कार्य या कारणवश कार्यालय में मौजूद नहीं थे। सीओ की गैरमौजूदगी के चलते संगठन के शिष्टमंडल और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच किसी भी प्रकार की आधिकारिक वार्ता नहीं हो सकी। अपनी समस्याओं को सुनने के लिए मुख्य अधिकारी को न पाकर प्रदर्शनकारी किसानों और मजदूरों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया।
नेताओं का संबोधन: जेल भरो आंदोलन की दी गई चेतावनी
सीओ की अनुपस्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए अंचल कार्यालय परिसर में ही एक विरोध सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए बी.प्रा.खे.म.यू. के जिला सचिव कॉ. शशि भूषण प्रसाद ने प्रशासनिक उदासीनता पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
आज अंचलाधिकारी की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रशासन गरीबों, किसानों और मजदूरों की समस्याओं के प्रति कितना असंवेदनशील है। आज हमारी कोई वार्ता नहीं हो सकी है, लेकिन हम शांत बैठने वाले नहीं हैं। यदि संगठन द्वारा सौंपी गई इन जनहित की मांगों पर प्रशासन ने शीघ्र ही कोई सकारात्मक पहल या ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में पूरे जिले में एक व्यापक और उग्र आंदोलन चलाया जाएगा। इसके अगले चरण में हम जेल भरो अभियान की शुरुआत करेंगे, और इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा संघर्ष
सभा को आगे बढ़ाते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष कॉ. रामनारायण यादव, अंचल अध्यक्ष कॉ. बिंदेश्वर पासवान एवं अंचल सचिव कॉ. रामकृष्ण यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि इस अंचल में किसानों, मजदूरों और समाज के सबसे पिछड़े तबके के लोगों की जायज मांगों को लगातार दबाया जा रहा है। अधिकारियों का रवैया जनविरोधी हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बी.प्रा.खे.म.यू. एक अनुशासित संगठन है और वे हमेशा शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते आए हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।
नेताओं ने स्थानीय जिला प्रशासन से मांग की कि वे लौकही अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और जनहित से जुड़ी सभी मांगों पर अविलंब कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस प्रदर्शन के बाद भी फाइलों को दबाया गया या गरीबों को परेशान किया गया, तो आंदोलन की आंच को और तेज किया जाएगा, जिसकी गूंज जिला मुख्यालय तक सुनाई देगी। इस प्रदर्शन में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, पंचायत प्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।








