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नरहिया में अतिक्रमण हटाने के बाद निष्पक्ष कार्रवाई की उठी मांग, ग्रामीणों ने कहा- भेदभाव बंद करे प्रशासन

नरहिया बाजार में अतिक्रमण हटाने के बाद ग्रामीणों ने अमीर-गरीब का भेदभाव भूलकर निष्पक्ष कार्रवाई और स्थायी समाधान की मांग की है।

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HIGHLIGHTS

  • लौकही प्रखंड के नरहिया बाजार में प्रशासन ने चलाया बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान।
  • ​वर्षों पुराने जाम से राहत मिलने की उम्मीद में लोगों ने किया प्रशासन की पहल का स्वागत।
  • ​अभियान की निष्पक्षता पर उठे सवाल; छोटे दुकानदारों को निशाना बनाने और रसूखदारों को छोड़ने का आरोप।
  • ​ग्रामीणों ने नरहिया हाट की सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की पुरजोर वकालत की।
  • ​सड़क जाम की समस्या से स्थायी मुक्ति के लिए दीर्घकालिक और पारदर्शी नीति बनाने की मांग।

लौकही (मधुबनी): प्रखंड के अंतर्गत आने वाले प्रमुख व्यावसायिक केंद्र नरहिया बाजार में प्रशासन द्वारा हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद क्षेत्र का माहौल गरमा गया है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ वर्षों से बाजार की सड़कों पर लगने वाले भीषण जाम से त्रस्त आम जनता ने प्रशासन के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है, वहीं दूसरी तरफ कार्रवाई के तौर-तरीकों और उसकी निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि प्रशासन का बुलडोजर केवल गरीबों पर चला है, जबकि रसूखदार लोग अब भी बचे हुए हैं।

जाम से राहत की उम्मीद, पर कार्रवाई पर उठे सवाल

नरहिया बाजार के स्थानीय निवासियों, राहगीरों, छात्र-छात्राओं और बड़े व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से सड़क के दोनों किनारों पर हुए अवैध कब्जों के कारण बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती थी। रोजाना लगने वाले लंबे जाम की वजह से न केवल स्कूली बच्चे समय पर स्कूल पहुंच पाते थे, बल्कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक फंस जाती थी। ऐसे में बाजार को इस समस्या से मुक्त कराने के लिए प्रशासन का यह अभियान बेहद जरूरी और स्वागत योग्य था। लोगों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से यातायात व्यवस्था में सुधार होगा।

परंतु, इस सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि कार्रवाई खत्म होते ही स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश भी पनपने लगा है। कई ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों ने सीधा आरोप लगाया है कि इस पूरे अभियान के दौरान केवल उन गरीब और लाचार लोगों को निशाना बनाया गया जो फुटपाथ या सड़क किनारे छोटी-मोटी दुकानें चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दूसरी ओर, बाजार के कई रसूखदार और प्रभावशाली लोगों ने जो पक्का अतिक्रमण कर रखा है, उन पर प्रशासन ने हाथ डालना भी मुनासिब नहीं समझा।

भेदभाव रहित और पारदर्शी नीति की मांग

ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वे बाजार को सुंदर और जाम मुक्त बनाने के पक्ष में हैं और वे अतिक्रमण हटाने का विरोध बिल्कुल नहीं कर रहे हैं। उनकी आपत्ति सिर्फ इस बात पर है कि कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं बरती गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि प्रशासन वास्तव में नरहिया बाजार को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त देखना चाहता है, तो अमीर और गरीब, छोटे और बड़े का अंतर मिटाकर सभी के खिलाफ समान रूप से कानूनी डंडा चलना चाहिए।

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि केवल कुछ चुनिंदा अस्थाई दुकानों को उजाड़ देने से समस्या का कभी भी स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इससे पहले भी कई बार भारी पुलिस बल के साथ यहां अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण कुछ ही दिनों बाद सड़क किनारे फिर से दुकानें सज गईं और स्थिति जस की तस हो गई। इसलिए प्रशासन को इस बार कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है।

नरहिया हाट की जमीन को मुक्त कराना ही एकमात्र समाधान

इस पूरे विवाद के बीच ग्रामीणों ने एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, जो इस समस्या की मुख्य जड़ माना जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेष रूप से मांग की है कि ऐतिहासिक नरहिया हाट की सरकारी भूमि को जल्द से जल्द भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है:

हाट की अधिकांश जमीन पर रसूखदारों ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसके कारण हाट सिकुड़ गया है। जगह न होने की वजह से छोटे व्यापारियों और गरीब दुकानदारों को मजबूरी में सड़क के किनारे अपनी दुकानें लगानी पड़ती हैं। अगर प्रशासन सूझबूझ दिखाए और हाट की जमीन को खाली कराकर वहां इन दुकानदारों को व्यवस्थित रूप से जगह दे दे, तो न तो किसी का रोजगार छिनेगा और न ही सड़क पर जाम लगेगा।

अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की इस जायज मांग को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या नरहिया बाजार को सचमुच निष्पक्षता के साथ एक स्थायी जाम मुक्त बाजार का रूप मिल पाता है या नहीं।

Rahul Kumar Priyadarshi

राहुल कुमार प्रियदर्शी एक अनुभवी पत्रकार और दिया एक्सप्रेस न्यूज चैनल के मुख्य संपादक (Chief-in-Editor) हैं। वर्तमान में वह भूमि न्यूज लाइव में बतौर रिपोर्टर अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले राहुल, बिहार और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी सटीक व निष्पक्ष खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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