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मधुबनी में पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ आक्रोश: फुलपरास प्रेस क्लब ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

मधुबनी में वरिष्ठ पत्रकार अजय धारी सिंह को अवैध हिरासत में प्रताड़ित करने के खिलाफ फुलपरास के पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।

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HIGHLIGHTS

  • वरिष्ठ पत्रकार का उत्पीड़न: मधुबनी नगर थाना में वरिष्ठ पत्रकार अजय धारी सिंह को 3 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से बैठाकर प्रताड़ित करने का आरोप।​
  • संविधान का उल्लंघन: पत्रकारों ने प्रशासन के इस कृत्य को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का खुला उल्लंघन बताया।
  • काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन: प्रेस क्लब फुलपरास के पत्रकारों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर काम किया और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
  • अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी: मांगें पूरी न होने पर 8 जून 2026 से मधुबनी समाहरणालय के सामने लाउडस्पीकर के साथ बेमियादी धरने का एलान। ​
  • व्यापक जनसमर्थन: स्थानीय समाजसेवियों और विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया घरानों के पत्रकारों ने आंदोलन को दिया अपना पूरा समर्थन।

मधुबनी (बिहार): बिहार के मधुबनी जिले में एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार और अवैध हिरासत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में पूरे जिले के मीडिया कर्मियों में गहरा रोष व्याप्त है। इसी कड़ी में प्रेस क्लब फुलपरास के तत्वावधान में अनुमंडल क्षेत्र के पत्रकारों ने अपने हाथों और बांहों पर काली पट्टी बांधकर एक शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मुखर विरोध प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में दोषी अधिकारियों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह शांत विरोध एक बड़े और व्यापक आंदोलन का रूप ले लेगा।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी और अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) सदर मधुबनी को सौंपे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह पूरा विवाद बीते 23 मई 2026 (शनिवार) का है। आरोप है कि जिला प्रशासन के कथित निर्देशों पर, मधुबनी के वरिष्ठ पत्रकार अजय धारी सिंह को जल-जमाव निरीक्षण के दौरान सहयोग करने के बावजूद, बिना किसी ठोस और वैध कानूनी आधार के नगर थाना मधुबनी में लगभग 3 घंटे से अधिक समय तक जबरन बैठाकर रखा गया।​

पत्रकारों का सीधा आरोप है कि इस दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकार को न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उनके सम्मान को भी ठेस पहुँचाई गई। मीडिया संगठनों का कहना है कि प्रशासन का यह दमनकारी कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश के हर नागरिक को प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन जीने के अधिकार का खुला उल्लंघन है। इस घटना की खबर जैसे ही आम हुई, समूचे पत्रकार जगत में प्रशासन के इस तानाशाही रवैये के खिलाफ असंतोष की लहर दौड़ गई।

​काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

घटना के बाद से ही जिले भर के पत्रकारों ने क्रमिक और सांकेतिक विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया था। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक कदम या सकारात्मक पहल नहीं की गई। प्रशासन की इस चुप्पी से नाराज होकर प्रेस क्लब फुलपरास से जुड़े पत्रकारों ने सामूहिक रूप से काली पट्टी बांधकर समाचार संकलन (News Reporting) और प्रेषण करने का निर्णय लिया।

​इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने एकजुटता का परिचय देते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मौके पर मौजूद वरिष्ठ पत्रकारों और समाजसेवियों ने एक सुर में कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए उनका यह संघर्ष हर स्तर पर जारी रहेगा।

अनिश्चितकालीन धरने और आंदोलन का अल्टीमेटम

मधुबनी समाहरणालय के समक्ष सौंपे गए आवेदन के अनुसार, पत्रकारों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है। पत्रकारों के समूह ने निर्णय लिया है कि आगामी 8 जून 2026 (सोमवार) को सुबह 11:00 बजे से मधुबनी समाहरणालय के सामने ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर) के साथ एक विशाल और शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि जब तक उन्हें इस मामले में उचित न्याय नहीं मिल जाता और दोषी पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है।

समाज और विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन

फुलपरास में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। इस मौके पर एकजुटता दिखाने वालों में समाजसेवी ब्रह्मानंद यादव, संतोष कुमार, राजकुमार पासवान, सुशील कुमार, देवकांत झा, जगदीश चौपाल, मो. फारूक, कृष्ण कुमार समेत भारी संख्या में स्थानीय मीडिया कर्मी और गणमान्य लोग उपस्थित थे।​

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पत्रकार समाज की आवाज होते हैं और यदि उन्हें ही सच दिखाने के बदले पुलिसिया प्रताड़ना झेलनी पड़े, तो यह एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। जिले के कई अन्य पत्रकार संगठनों, जिनमें आकाशवाणी, एबीपी न्यूज, हिंदुस्तान, प्रभात खबर और लाइव आर्यावर्त मीडिया के स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हैं, ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है।

Rahul Kumar Priyadarshi

राहुल कुमार प्रियदर्शी एक अनुभवी पत्रकार और दिया एक्सप्रेस न्यूज चैनल के मुख्य संपादक (Chief-in-Editor) हैं। वर्तमान में वह भूमि न्यूज लाइव में बतौर रिपोर्टर अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले राहुल, बिहार और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी सटीक व निष्पक्ष खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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