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भोजपुर एनकाउंटर में बड़ा मोड़: सरेंडर के बाद मारी थीं 5 गोलियां? DSP और SHO पर हत्या का मुकदमा दर्ज!

भोजपुर के कथित भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मां आशा देवी की शिकायत पर डीएसपी और थानाध्यक्ष समेत पुलिसकर्मियों पर हत्या की एफआईआर दर्ज हुई है।

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HIGHLIGHTS

  • बड़ी कार्रवाई: कथित एनकाउंटर के 7 दिनों बाद सरकार और प्रशासन एक्शन में, दोषी पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा।
  • नामजद आरोपी: जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (DSP), शाहपुर थानाध्यक्ष (SHO) और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज।
  • शाहपुर थाना केस नंबर: इस मामले में शाहपुर थाना कांड संख्या 178/26 (दिनांक 22/06/2026) दर्ज की गई है।
  • लगाई गई धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या), 140 (अपहरण या चोट पहुंचाने के लिए मजबूर करना) और 3(5) के तहत मामला दर्ज।
  • मां का गंभीर आरोप: आवेदिका आशा देवी का आरोप है कि उनके बेटे ने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद डीएसपी के आदेश पर उसे 5 गोलियां मारी गईं।

भोजपुर/आरा: बिहार के भोजपुर जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पुलिस महकमे के साथ-साथ पूरे राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी ग्राम निवासी भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर मामले में आखिरकार राज्य सरकार और जिला प्रशासन को झुकना पड़ा है। घटना के ठीक सात दिनों के बाद, भारी जन आक्रोश और मृतक की मां द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में शाहपुर थाने में कांड संख्या 178/26 दर्ज की गई है, जिसमें जगदीशपुर के पुलिस उपाधीक्षक (DSP), शाहपुर के थानाध्यक्ष (SHO) समेत कई अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

क्या है पूरा मामला और मां का आरोप?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बीते 17 जून 2026 की सुबह करीब 8:00 बजे की है। मृतक भारत भूषण तिवारी की मां आशा देवी (पति काशीनाथ तिवारी) द्वारा पुलिस अधीक्षक (SP), आरा को दिए गए आवेदन में बेहद सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के मुताबिक, 17 जून की सुबह शाहपुर थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मी, जगदीशपुर डीएसपी के नेतृत्व में उनके बिलौटी स्थित आवास पर पहुंचे। पुलिस ने भारत भूषण तिवारी से कहा कि चलो, जहां जसवंतिया बाढ़ विस्थापित रह रहे हैं, वहां चलकर बताओ कि उन लोगों की क्या समस्याएं हैं और उनकी क्या मांगें हैं। चूंकि भारत तिवारी लगातार जसवंतिया बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को उठा रहे थे और प्रशासन को इससे अवगत करा रहे थे, इसलिए वे पुलिस के साथ चले गए।

आशा देवी ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जसवंतिया बाढ़ पीड़ितों के शिविर के पास पहुंचने पर उनके पुत्र भारत तिवारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार फेसबुक लाइव (Facebook Live) कर रहे थे। उन्होंने अपनी और बाढ़ पीड़ितों की मांगें प्रशासन के सामने रखीं। इसके बाद, उन्होंने अपने हाथ में लिया हुआ हथियार खुद ही पुलिस के सामने जमीन पर रख दिया और पूरी तरह से आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया।

सरेंडर के बाद धोखे से गोली मारने का आरोप

पीड़ित मां का आरोप है कि हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने के बावजूद पुलिस का दिल नहीं पिघला। जैसे ही भारत तिवारी ने हथियार नीचे रखे, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन धक्का देकर पास के एक गड्ढे में गिरा दिया। इसके तुरंत बाद, वहां उपस्थित जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ने चिल्लाकर आदेश दिया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने निहत्थे भारत तिवारी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आरोप है कि उन्हें बेहद करीब से लगातार पांच गोलियां मारी गईं, जिससे वे लहुलूहान होकर वहीं गिर पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें अपनी गाड़ी में लादकर वहां से ले गए।

इतना ही नहीं, आवेदिका का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने उनके पति काशीनाथ तिवारी को भी शाहपुर थाने में ले जाकर दिनभर अवैध हिरासत में बंद रखा। शाम को उन्हें छोड़ते समय पुलिस ने बेहद ठंडे अंदाज में सूचना दी कि उनके पुत्र भारत भूषण तिवारी की मृत्यु हो चुकी है।

7 दिनों के भारी दबाव के बाद एक्शन में आई सरकार

इस कथित एनकाउंटर के बाद स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त था। पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे और इसे फर्जी एनकाउंटरहिरासत में हत्या का मामला बताया जा रहा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। अंततः घटना के 7 दिनों बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शाहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मुख्य रूप से धारा 103 (जो हत्या के लिए सजा का प्रावधान करती है), धारा 140 (किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाने या उसकी हत्या के उद्देश्य से अपहरण या बंधक बनाना) और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

इलाके में तनावपूर्ण शांति, उच्च स्तरीय जांच की मांगपुलिस अधिकारियों पर सीधे हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद भोजपुर पुलिस महकमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई भी वरिष्ठ अधिकारी अभी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहा है। वहीं दूसरी ओर, मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ प्राथमिकी दर्ज होना काफी नहीं है, बल्कि आरोपी डीएसपी और थानाध्यक्ष को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस घटनाक्रम ने बिहार में पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।

Kartik Kumar

कार्तिक कुमार एक पत्रकार और लेखक हैं। उन्होंने कृषि विज्ञान में पढ़ाई और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वे लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल भूमि न्यूज़ लाइव के संस्थापक हैं। ​कार्तिक की राजनीतिक समझ बहुत मजबूत है। वे गांव की पंचायत से लेकर देश की लोकसभा तक की ख़बरें लिखते हैं। साथ ही, उन्हें नेताओं की जीवनी (बायोग्राफी) लिखने का भी बड़ा हुनर है।

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