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मधुबनी के घोघरडीहा में PDS बहाली में धांधली के खिलाफ पीड़िता डीएम कोर्ट पहुंची। समाजसेवियों ने एमओ पर EOU जांच मांगी।

मधुबनी के घोघरडीहा में PDS बहाली में धांधली के खिलाफ पीड़िता डीएम कोर्ट पहुंची। समाजसेवियों एमओ पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से जांच की मांग उठा रहे हैं।

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HIGHLIGHTS

  • अंकों की हेराफेरी: 75.22% अंक वाली महिला को छोड़ 58.86% अंक वाले को मेधा सूची में पहला स्थान मिला।
  • फर्जीवाड़ा: आरोपी पहले से मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 लाख रुपये का लाभ लेकर बिजनेस कर रहा है।
  • नियमों का उल्लंघन: आरोपी खुद मसाला और आटा चक्की का मालिक है, जो PDS नियमों के खिलाफ है।
  • ​समाजसेवी फिरोज यादव और नंद कुमार गुप्ता ने एमओ (MO) के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से जांच की मांग की।

घोघरडीहा, मधुबनी: बिहार सरकार भले ही सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा करे, लेकिन जमीन पर बैठे भ्रष्ट अधिकारी सरकार की छवि को दागदार करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला मधुबनी जिले के घोघरडीहा नगर पंचायत (वार्ड नंबर-01) का है, जहां जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकान के लाइसेंस आवंटन में नियमों को ताक पर रखकर भारी खेल किया गया है। अधिकारियों की मिलीभगत से एक ऐसे व्यक्ति को मेधा सूची में अव्वल बना दिया गया जो पहले से करोड़पति बनने की राह पर है, जबकि सबसे ज्यादा अंक लाने वाली योग्य महिला अभ्यर्थी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस धांधली के खिलाफ पीड़िता गुड़िया कुमारी ने हार नहीं मानी है और न्याय के लिए जिला दंडाधिकारी (डीएम) सह समाहर्ता, मधुबनी के न्यायालय में वाद संख्या xxx/2026 दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही बिहार सरकार के सहोयोग पोर्टल (RTMS) पर भी इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

75% अंक वाली महिला पीछे, 58% वाला रसूखदार आगे

विभागीय विज्ञापन (ज्ञापांक 833 / जिला आपूर्ति मधुबनी) के तहत घोघरडीहा नगर पंचायत के लिए रिक्त क्रमांक 69 पर अनारक्षित कोटि के तहत PDS डीलरशिप के लिए आवेदन मांगे गए थे। जब 22 जनवरी 2026 को औपबंधिक मेधा सूची जारी हुई, तो उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।

पोस्ट ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) में 75.22% अंक हासिल करने वाली गुड़िया कुमारी को जानबूझकर दूसरे स्थान पर धकेल दिया गया। वहीं, महज 58.86% अंक लाने वाले उमेश कुमार (पिता- रामेश्वर प्रसाद) को एक संदिग्ध और विवादित विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नंबर-1 पर बिठा दिया गया। गुड़िया कुमारी ने तय समय के भीतर सबूतों के साथ अधिकारियों के सामने आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन फुलपरास अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और घोघरडीहा के आपूर्ति निरीक्षक (MO) ने पीड़िता की आपत्ति को कचरे के डिब्बे में डाल दिया और चुपके से अंतिम मेधा सूची जारी कर दी।

PDS नियम क्या कहते हैं?

बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के नियम (कंडिका 9) के अनुसार, PDS दुकान का लाइसेंस केवल उसी व्यक्ति को मिल सकता है जो पूर्णतः बेरोजगार हो। इसके अलावा, कोई भी आटा चक्की का मालिक या उसका नजदीकी रिश्तेदार इस लाइसेंस के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। इस मामले में आरोपी इन दोनों नियमों का उल्लंघन करता है, फिर भी अधिकारियों ने उसे हरी झंडी दे दी।

अकूत संपत्ति की मालकी और फर्जीवाड़े के सबूत

डीएम कोर्ट में सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, उमेश कुमार के खिलाफ दो ऐसे पुख्ता सबूत हैं जो पूरी बहाली प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े करते हैं:

  • आटा चक्की के मालिक: महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, मधुबनी के पत्र संख्या 508 (दिनांक 01.04.2026) से यह साबित हो चुका है कि उमेश कुमार खुद मसाला और आटा चक्की का संचालन करते हैं।
  • 10 लाख का सरकारी लाभ: आरोपी ने साल 2023 में ही सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना (आवेदन संख्या- CMEBC20 23423479781 LS) के तहत ₹10 लाख का लोन लेकर अपना व्यवसाय स्थापित किया है।

बड़ा सवाल: जो व्यक्ति पहले से ही ₹10 लाख का सरकारी लोन लेकर उद्यमी बन चुका है, वह आपूर्ति निरीक्षक (MO) की फाइलों में अचानक बेरोजगार और सबसे लाचार कैसे हो गया? इसी बड़े खेल को उजागर करने के लिए अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और विजिलेंस जांच की मांग उठ रही है।

समाजसेवियों के तीखे बयान

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक हलकों में उबाल आ गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ क्षेत्र के दिग्गजों ने मोर्चा खोल दिया है।

बाबूबरही के रहने वाले BDO की तरह नपेंगे भ्रष्ट अधिकारी, करवाएंगे जांच — फिरोज यादव (युवा समाजसेवी)

घोघरडीहा PDS बहाली में जो खेल खेला गया है, उसकी पूरी कुंडली और जानकारी सरकार तक पहुँचाएगे। यह किसी सामान्य नियम की अनदेखी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे गरीब के हक पर सरेआम डाका है। सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और कोई भी भ्रष्टाचारी अब बच नहीं पाएगा।

अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी कुछ ही समय पहले कानून तोड़ने वाले दरभंगा के केवटी के बीडीओ (BDO) (जो मूल रूप से हमारे मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड के रहने वाले हैं) के खिलाफ सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में कैसा सीधा और कड़ा एक्शन लिया है। ठीक उसी तर्ज पर, इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल घोघरडीहा के एमओ (MO) और अन्य दोषी अधिकारियों को भी नापा जाएगा।​

हम लोग इस अन्याय पर चुप बैठने वाले नहीं हैं। इस पूरे मामले को साक्ष्यों के साथ मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और पटना के वरीय अधिकारियों के टेबल तक ले जाएंगे। घोघरडीहा की जनता की गाढ़ी कमाई लूटकर इन अधिकारियों ने जो अवैध साम्राज्य खड़ा रहा है, उसके खिलाफ हम आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से जांच की मांग रखेंगे। इन भ्रष्ट अफसरों को अपनी पाई-पाई और अकूत धन-दौलत का पूरा हिसाब सरकार को देना ही होगा।

जो पहले से 10 लाख खाकर बैठा है, वो बेरोजगार कैसे हो गया?— नंद कुमार गुप्ता (स्थानीय)

यह पूरी तरह से अंधेर नगरी और चौपट राजा वाला हिसाब है। जिस व्यक्ति के नाम पर फर्जी तरीके से PDS का लाइसेंस जनरेट किया गया है, वह पूर्व में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत ₹10 लाख डकार चुका है। PDS का लाइसेंस केवल और केवल उस गरीब के लिए होता है जो पूरी तरह बेरोजगार हो ताकि उसका घर चल सके। जो व्यक्ति पहले से सरकार के 10 लाख रुपये लेकर बड़ा रोजगार कर रहा है, वह सम्राट सरकार की फाइलों में बेरोजगार कैसे दिख गया? हमारी साफ मांग है कि इस पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो। साथ ही, संबंधित एमओ की संपत्ति की भी जांच की जाए कि जब वे नौकरी में आए थे तब उनके पास क्या था और आज इस कुर्सी पर बैठने के बाद उनकी संपत्ति कितने गुना बढ़ गई है। ऐसे भ्रष्ट पदाधिकारियों के कारण ही सरकार बदनाम होती है।

पीड़िता की कोर्ट से गुहार

पीड़िता गुड़िया कुमारी ने अपनी अर्जी में साफ कहा है कि जब तक इस मामले की पूरी कानूनी समीक्षा नहीं हो जाती और संबंधित कार्यालय से मूल अभिलेख (LCR) तलब नहीं कर लिए जाते, तब तक इस विवादित दुकान के लाइसेंस जारी करने पर तुरंत रोक लगाई जाए और इस फर्जी मेधा सूची को पूरी तरह से रद्द किया जाए।

Chitra Jha

चित्रा झा पटना हाई कोर्ट में अधिवक्ता हैं। वे भूमि न्यूज़ लाइव के संस्थापक सदस्य एवं सक्रिय सहयोगी हैं। कानून और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों में कार्यरत रहते हुए वे न्यूज़ स्क्रिप्ट लेखन और सामाजिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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