बिहारशरीफ के एक निजी सभागार में ग्रामीण कार्य विभाग के संवेदकों (ठेकेदारों) की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपात बैठक आयोजित की गई। संवेदक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिले भर से भारी संख्या में ठेकेदार जुटे। बैठक का माहौल शुरुआत से ही गरमाया रहा, जहां संवेदकों ने विभाग की नीतियों और कार्यशैली के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। ठेकेदारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों और समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे निर्माण कार्य ठप कर पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री और विभागीय मंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध
संकट की इस घड़ी में संवेदक संघ ने सूबे के मुखिया और शीर्ष नेतृत्व से न्याय की गुहार लगाई है। संघ ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री और मंत्री, ग्रामीण कार्य विभाग से इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का पुरजोर अनुरोध किया है। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग के अधिकारी जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठे हैं, इसलिए अब सरकार के शीर्ष स्तर से हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने मंत्रियों से मांग की है कि वे इस नीतिगत और आर्थिक गतिरोध को दूर कर संवेदकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि राज्य में विकास की रफ्तार न थमे।
भुगतान नहीं और रद्द हो रहे एग्रीमेंट: संवेदकों का गंभीर आरोप
बैठक के दौरान संवेदकों ने ग्रामीण कार्य विभाग पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। ठेकेदारों का कहना है कि कई मामलों में विभाग बिना पिछला भुगतान किए ही एकरारनामा (एग्रीमेंट) विखंडन की एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। यह पूरी तरह से गैर-कानूनी और संवेदकों को बर्बाद करने वाली नीति है।

संवेदकों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि सड़क और अन्य विकास योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन विभाग फंड दबाकर बैठा है। भुगतान लंबित होने के कारण छोटे और मध्यम दर्जे के संवेदकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि ठेकेदारों के लिए साइट पर काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी और सप्लायरों के बकाये का भुगतान करना नामुमकिन हो गया है।
मटेरियल की किल्लत और दोगुनी हुई अलकतरा-इमल्शन की कीमत
बैठक में निर्माण सामग्री की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। संवेदकों ने आरोप लगाया कि सरकार और विभाग द्वारा निर्धारित लीज क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में पत्थर और बालू उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जब बेस मटेरियल ही नहीं मिलेगा, तो सड़कें समय पर कैसे बनेंगी?इसके अलावा, संवेदकों ने बाजार की कड़वी सच्चाई को सामने रखते हुए कहा कि सड़क निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अलकतरा (बिटुमेन) और इमल्शन की कीमतों में लगभग दोगुनी वृद्धि हो चुकी है। इस अप्रत्याशित महंगाई के कारण परियोजनाओं की वास्तविक लागत बजट से काफी ऊपर चली गई है। ठेकेदारों का कहना है कि एक तरफ विभाग फंड नहीं दे रहा, दूसरी तरफ सामग्रियां महंगी हो चुकी हैं, और इन सबके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी समय पर काम पूरा करने का मानसिक दबाव बना रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुचित है।
दबाव की राजनीति से प्रभावित हो रहे विकास कार्य
संवेदक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार भुगतान में देरी और अधिकारियों के बेवजह के प्रशासनिक दबाव के कारण जमीन पर चल रहे विकास कार्य सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। ठेकेदार कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने सरकार के शीर्ष मंत्रियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि लंबित राशि का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में ये रहे मौजूद, बनाई आगे की रणनीति
इस महाबैठक में संवेदक संघ के सचिव प्रफुल्ल कुमार पटेल, उपाध्यक्ष राम प्रसाद सिंह, कार्यकारी सदस्य दिलीप वर्मा, प्रेम कुमार सिंह, कुमुद रंजन सरकार, डॉ. नरेंद्र विद्यार्थी और रजनीश कुमार समेत ग्रामीण कार्य विभाग के सैकड़ों संवेदक मौजूद रहे। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि यदि सरकार और विभाग ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला, तो इस लड़ाई को पटना तक ले जाया जाएगा और पूरे बिहार में काम बंद कर प्रदर्शन किया जाएगा।






