संघर्ष को मात देकर अफसर बनी मधुबनी की बेटी: पिता का साया उठने पर मां ने पाला, अब BPSC क्रैक कर डूमरा गांव का नाम किया रोशन
BPSC 70th Success Story: कहा जाता है कि अगर हौसलों में उड़ान हो और इरादे फौलादी हों, तो किस्मत के पन्नों को भी बदला जा सकता है। ऐसा ही एक जीता-जागता उदाहरण पेश किया है मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले डूमरा गांव की लाडली आरती कुमारी ने। BPSC 70वीं की परीक्षा में आपूर्ति पदाधिकारी (सप्लाई इंस्पेक्टर) के रूप में अंतिम रूप से चयनित होने के बाद आरती कुमारी जब पहली बार अपने पैतृक गांव डूमरा पहुंचीं, तो वहां का नजारा ऐतिहासिक था। और हर आंख में गर्व के आँसू साफ देखे जा सकते थे।
बचपन में उठा पिता का साया, मां के संघर्ष ने सींची कामयाबी
आरती कुमारी की यह सफलता कोई साधारण कामयाबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे संघर्ष का एक बहुत बड़ा समंदर है। आरती कुमारी जब बेहद छोटी थीं, तभी उनके पिता का साया हमेशा के लिए उनके सिर से उठ गया था। पिता ने अपनी आंखों में एक सपना संजोया था कि उनकी लाडली बेटी पढ़-लिखकर एक बड़े प्रशासनिक पद पर जाए और समाज की सेवा करे। पिता के इसी अधूरे सपने को जिंदा रखने की जिम्मेदारी उनकी माता रानी कुमारी ने उठाई।
विपरीत और विकट परिस्थितियों से लोहा लेते हुए मां रानी कुमारी ने मधेपुर प्रखंड के तरडिहा गांव में रहकर अपने दोनों बच्चों के लालन-पालन और पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा संभाला। मां की उसी अटूट तपस्या का परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है कि उनकी बड़ी बेटी आरती कुमारी आज एक प्रशासनिक अधिकारी बन चुकी हैं, जबकि उनकी छोटी बहन भी वर्तमान में मेडिकल की पढ़ाई कर देश की सेवा के लिए खुद को तैयार कर रही हैं।
दो बार मिली असफलता, लेकिन तीसरे प्रयास में मारी बाजी
आरती कुमारी की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो एक या दो असफलताओं के बाद हिम्मत हार जाते हैं। आरती कुमारी इससे पूर्व में भी दो बार BPSC की कठिन मुख्य परीक्षा (Mains) लिख चुकी थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से उनका अंतिम चयन नहीं हो सका था। लगातार दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कमजोरियों को अपनी ताकत बनाया। यह उनका पहला मौका था जब वे साक्षात्कार (Interview) की टेबल तक पहुंचीं और पहले ही इंटरव्यू में उन्होंने सीधे सफलता का परचम लहरा दिया।
अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद भावुक होते हुए आरती कुमारी ने इसका पूरा श्रेय अपनी माता रानी कुमारी, अपनी छोटी बहन और अपने पूरे परिवार को दिया। साथ ही उन्होंने अपने छोटे पापा यानी चाचा संजय कुमार (जो कार्यरत शिक्षक हैं) के सराहनीय योगदान को रेखांकित किया। आरती ने विशेष रूप से पटना में रहने वाले प्रोफेसर बैद्यनाथ राम का भी आभार व्यक्त किया, जो उनके चाचा के करीबी मित्र हैं और जिन्होंने पटना में रहकर आरती को एक गार्जियन की तरह सही राह दिखाई।
एक ऐसा प्रतिष्ठित परिवार, जिसकी रग-रग में है शिक्षा
आरती कुमारी एक ऐसे प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं जहां शिक्षा की जड़ें बेहद मजबूत हैं। आरती के दादाजी कुल पाँच भाई हैं, जिनमें सबसे बड़े दादाजी जयप्रकाश यादव हैं। उनके ठीक बाद मंझले दादाजी नारायण यादव हैं, जो प्लस टू उच्च विद्यालय जयनगर के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन्होंने ही इस गौरवशाली क्षण को सार्वजनिक रूप से साझा किया। इसके अलावा उनके अन्य दादाजी प्रमोद नारायण यादव (सेवानिवृत्त शिक्षक), लाल बहादुर यादव (सेवानिवृत्त शिक्षक) और सबसे छोटे दादाजी अनिल कुमार (कार्यरत शिक्षक) हैं।
इस सुशिक्षित परिवार में युवाओं की भी लंबी फेहरिस्त है जिसमें इंजीनियर आनंद कुमार, डॉक्टर परमानंद कुमार, आंगनवाड़ी सेविका चची और समाज सेवा में सक्रिय रहने वाले चाचागण अरविंद कुमार, अखिलेश कुमार, मुकेश कुमार, अंजनी कुमार सहित चचेरे भाई जीवितेश कुमार शामिल हैं। आज इस पूरे भरे-पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
सम्मान समारोह में उमड़ा जनसैलाब, दिग्गजों ने दिया आशीर्वाद
आरती कुमारी के सम्मान में कल दोपहर ठीक 3:00 बजे डूमरा गांव के सामाजिक लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जैसे ही आरती ने कार्यक्रम स्थल पर कदम रखी, वहां मौजूद जनसैलाब ने तालियों और फूलों की बारिश के साथ उनका स्वागत किया। इस मौके पर क्षेत्र के तमाम प्रमुख जनप्रतिनिधि आरती को बधाई देने पहुंचे।
समारोह में मुख्य रूप से अंधराठाढ़ी प्रखंड के प्रखंड प्रमुख भोला यादव, डूमरा के मुखिया लालू यादव, ठाढ़ी के मुखिया छोटू राय और जिला परिषद क्षेत्र संख्या 47 के सदस्य के पति संजय चौधरी उपस्थित रहे, जिन्होंने आरती को शॉल और माला पहनाकर सम्मानित किया। वहीं जिला परिषद क्षेत्र संख्या 48 के जिला परिषद सदस्य सह जीप उपाध्यक्ष संजय यादव कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत से पूर्व में ही आकर आरती कुमारी को सम्मानित कर अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं दे चुके थे।

आरती की इस सफलता ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है कि आज के आधुनिक दौर में अब बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। पूरे अंधराठाढ़ी प्रखंड और डूमरा गांव में यह संदेश फैल चुका है कि यदि बेटियों को सही अवसर और परिवार का साथ मिले, तो वे आसमान की ऊंचाइयों को छू सकती हैं।








