मधुबनी (लौकही): बिहार के मधुबनी जिले के अंतर्गत लौकही प्रखंड के झहुरी पंचायत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, धोबीयाही के परिसर में एक भव्य कृषि जनकल्याण चौपाल सह खेत बचाओ अभियान-2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), मधुबनी के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। हालांकि, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस चौपाल का आयोजन पंचायत कृषि कार्यालय में होना था, लेकिन अधिक से अधिक किसानों, बटाईदारों और ग्रामीणों को जागरूक करने तथा उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेकर इसका स्थान बदलकर विद्यालय परिसर किया गया। इस बदलाव का सकारात्मक असर भी दिखा और चौपाल में भारी संख्या में स्थानीय किसान और ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित हुए।
आधुनिक कृषि और सरकारी योजनाओं पर मंथन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लौकही के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रवि रंजन कुमार और कृषि समन्वयक सज्जन कुमार ने किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए उन्नत बीज, सही फसल प्रबंधन और समय पर मृदा परीक्षण (Soil Testing) बेहद जरूरी है।
किसान सलाहकार राजेंद्र ठाकुर और सिमाब जमीर सहित अन्य उपस्थित कृषि पदाधिकारियों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी और अनुदान योजनाओं की बिंदुवार विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि किसान अब ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर बेहद कम और रियायती कीमतों पर उन्नत किस्म के पौधे और अन्य आवश्यक कृषि सामग्रियां सीधे प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, चौपाल में जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई व्यवस्था और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त बीडीओ एवं लौकही के सम्मानित निवासी रजत किशोर सिंह ने किसानों को खेती के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की अपील की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
धरती और जल हमारे सबसे बड़े संसाधन हैं। अगर हम अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग करेंगे और पानी की बर्बादी नहीं रोकेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती करना असंभव हो जाएगा। इसलिए हर किसान को अपनी जमीन के एक हिस्से पर वृक्षारोपण करना चाहिए और प्राकृतिक खेती (Organic Farming) की ओर कदम बढ़ाना चाहिए।
किसानों ने उठाई कोल्ड स्टोरेज की मांग
इस चौपाल की एक मुख्य विशेषता यह रही कि यह केवल एकतरफा भाषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ। चर्चा के दौरान स्थानीय किसानों ने पंचायत स्तर पर एक आधुनिक कोल्ड स्टोरेज (शीतगृह) की स्थापना की मांग को बेहद प्रमुखता से उठाया। किसानों का कहना था कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टमाटर, केला, हरी मिर्च और अन्य मौसमी सब्जियों व फलों का उत्पादन होता है। परंतु, स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होने के कारण वे अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख पाते। नतीजतन, उन्हें औने-पौने दामों पर बिचौलियों को फसल बेचनी पड़ती है, जिससे हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अधिकारियों ने किसानों की इस जायज मांग को गंभीरता से सुना और इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

फसल सुरक्षा और पानी की समस्या का डिजिटल समाधान
चौपाल में किसानों ने जंगली जानवरों जैसे नीलगाय और जंगली सूअरों द्वारा फसलों को नष्ट किए जाने की गंभीर समस्या को भी अधिकारियों के समक्ष रखा। इस पर कृषि पदाधिकारियों ने तकनीकी समाधान बताते हुए कहा कि फसल सुरक्षा और फेंसिंग आदि के लिए सरकार की संबंधित वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करने का प्रावधान है, जिसके बाद विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इसके साथ ही, गर्मी के मौसम में भूजल स्तर नीचे चले जाने और चापाकल सूख जाने के कारण फसलों को होने वाले नुकसान पर भी मार्गदर्शन दिया गया। किसानों को बताया गया कि वे ऐसी आपातकालीन स्थितियों में अपनी शिकायत सरकार के समर्पित लोक शिकायत निवारण या कृषि पोर्टल पर दर्ज करवा सकते हैं, ताकि त्वरित वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
कृषि उपकरणों पर ₹40 हजार तक का अनुदान
किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बोरिंग और अन्य आधुनिक कृषि उपकरणों के लिए आवेदन करने की पारदर्शी प्रक्रिया समझाई गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत जब किसान ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद की तीन विभिन्न पंजीकृत कंपनियों का चयन करने का विकल्प मिलता है। इनमें से किसी एक चुनी हुई कंपनी द्वारा किसान के खेत पर पूरी तकनीकी व्यवस्था (जैसे बोरिंग या टूल सेटअप) स्थापित की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा पात्र किसानों को लगभग 40 हजार रुपये तक का भारी अनुदान (Subsidy) सीधे प्रदान किया जाता है, जिससे छोटे किसानों पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।
सीधे संवाद से समस्याओं का त्वरित पंजीकरण
कार्यक्रम के उत्तरार्ध में, चौपाल में उपस्थित सभी किसानों की व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याओं को लिखित रूप में दर्ज करने के लिए विभाग की ओर से एक विशेष प्रपत्र (Form) उपलब्ध कराया गया। किसानों ने उत्साहपूर्वक अपनी समस्याओं, जैसे- खाद की किल्लत, बीज की गुणवत्ता और सिंचाई की कमियों से अधिकारियों को अवगत कराया और फॉर्म भरकर जमा किए।
कार्यक्रम के समापन सत्र में अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि इस तरह की ग्रामीण चौपालों का मुख्य उद्देश्य प्रशासन और अन्नदाता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। जब तक किसान सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक होकर आधुनिक तकनीक को नहीं अपनाएंगे, तब तक खेती को पूरी तरह लाभकारी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सभी ग्रामीणों से आपसी सहयोग और कृषि विभाग के निरंतर संपर्क में रहने का आह्वान किया।







